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कुशीनगर का 200 साल पुराना राम-जानकी मंदिर जर्जर, ग्रामीणों ने जीर्णोद्धार की उठाई मांग

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कुशीनगर का 200 वर्ष पुराना राम-जानकी मंदिर बदहाली की मार झेल रहा, ग्रामीणों ने उठाई जीर्णोद्धार की मांग

जर्जर भवन, बदहाल संपर्क मार्ग और उपेक्षित पोखरे को लेकर क्षेत्रवासियों में नाराजगी

कुशीनगर | कुशीनगर जिले के हाटा तहसील क्षेत्र स्थित पैकौली लाला के समीप लगभग 200 वर्ष पुराने ऐतिहासिक राम-जानकी मंदिर की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कभी क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा यह प्राचीन मंदिर आज रखरखाव के अभाव में जर्जर हो चुका है। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मंदिर के शीघ्र जीर्णोद्धार तथा परिसर के विकास की मांग की है।

दीवारों और छतों में दरारें, हादसे का खतरा

मंदिर के पुजारी मदन दास के अनुसार, मंदिर में भगवान श्रीराम, माता जानकी, भगवान शिव-पार्वती और बजरंगबली सहित कई देवी-देवताओं की प्राचीन अष्टधातु की प्रतिमाएं स्थापित हैं।

उन्होंने बताया कि लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण मंदिर की दीवारों और छतों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। भवन की जर्जर स्थिति के चलते भविष्य में किसी दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है।


संपर्क मार्ग और पोखरा भी उपेक्षा का शिकार

ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर तक पहुंचने वाला मुख्य संपर्क मार्ग भी काफी खराब हो चुका है। बरसात के मौसम में श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

मंदिर परिसर के पास स्थित प्राचीन पोखरा भी साफ-सफाई और संरक्षण के अभाव में बदहाल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पोखरे का सौंदर्यीकरण कराया जाए ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान बरकरार रह सके।

महाशिवरात्रि पर लगता है विशाल मेला

स्थानीय लोगों के अनुसार, हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद मंदिर और उससे जुड़े धार्मिक स्थल विकास से वंचित हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से मंदिर के जीर्णोद्धार की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

ग्रामीणों की प्रशासन से अपील

क्षेत्रवासियों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि इस ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर का संरक्षण करते हुए मंदिर का जीर्णोद्धार, संपर्क मार्ग का निर्माण और प्राचीन पोखरे का सौंदर्यीकरण कराया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रह सकें।

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